बिहारसरकारनेराज्यकेचीनीउद्योगमेंनवीनजीवनफूंकनेकेलिएविशेषतयारी शुरू कर दी है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देशन और गन्ना उद्योग विभाग की देखरेख में राज्य के 14 जिलों में नई चीनी मिलों की स्थापना और बंद पड़े चीनी मिल परिसरों के पुनरुद्धार की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।इस योजना का उद्देश्य केवल नई मिलों की स्थापना नहीं बल्कि राज्य के गन्ना किसानों को स्थायी आय, रोजगार सृजन और कृषि उद्योग के विकास के अवसर प्रदान करना है।अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रस्तावित चीनी मिल के लिए चयनित भूमि कम से कम 100 एकड़ की होनी चाहिए और इसके आसपास 30-40 हजार एकड़ क्षेत्र में गन्ना की खेती उपलब्ध होनी चाहिए।पत्र में सभी जिलाधिकारियों से निजी और सरकारी दोनों प्रकार की भूमि की उपलब्धता का मूल्यांकन कर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
अपर मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई चीनी मिल के चयनित स्थल पर गन्ना उत्पादन की स्थिति, सिंचाई सुविधा, परिवहन सुविधा और मजदूर उपलब्धता का विस्तृत अध्ययन किया जाए।मौजूदा और बंद पड़े चीनी मिल परिसरों को भी विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है ताकि निवेश और उत्पादन लागत को संतुलित किया जा सके।इसके लिए राज्य सरकार ने विशेष कृषि टास्क फोर्स बनाने का भी निर्णय लिया है, जो भूमि चयन, गन्ना उत्पादन और सिंचाई जैसी सभी जरूरी पहलुओं का मूल्यांकन करेगी।
इस पहल के तहत सरकार ने पटना, नवादा, वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, गया, शिवहर, रोहतास और पूर्णिया जिले को चिन्हित किया है।जिलाधिकारी इन जिलों में संभावित स्थलों की पहचान करेंगे और रिपोर्ट में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करेंगे, ताकि सरकार निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर सके।
सरकार का मानना है कि इस योजना से न केवल नए निवेश के अवसर पैदा होंगे बल्कि गन्ना किसानों की आय स्थिर होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन भी होगा।इसके अलावा, बंद पड़े मिल परिसरों का पुनरुद्धार करने से राज्य में चीनी उद्योग की प्राचीन विरासत को भी संरक्षित किया जा सकेगा और उद्योग के प्रबंधन में नवीन तकनीकों को अपनाने का अवसर मिलेगा।
गन्ना उद्योग विभाग का कहना है कि योजना का एक अहम हिस्सा मिल के आसपास के क्षेत्रों में गन्ना की खेती की सुविधा सुनिश्चित करना है।सरकार चाहती है कि चुनी गई भूमि के आसपास पर्याप्त गन्ना उत्पादन उपलब्ध हो ताकि मिलों का संचालन निरंतर और दक्षतापूर्वक किया जा सके।इसके लिए जिलाधिकारियों को स्थानीय किसानों, कृषि विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर विस्तृत सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है।
अपर मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि प्रस्तावित चीनी मिल स्थल की पूरी बुनियादी ढांचा स्थिति का मूल्यांकन किया जाए।सड़क, बिजली, जल आपूर्ति, श्रमिक उपलब्धता और परिवहन सुविधा जैसी सभी आवश्यकताओं का अध्ययन किया जाए, ताकि निवेश और उत्पादन प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके।
बिहार सरकार की इस पहल से राज्य में चीनी उद्योग के विकास के साथ-साथ किसानों के लिए आर्थिक अवसरों में वृद्धि की उम्मीद की जा रही है।सरकार का कहना है कि यह योजना केवल उद्योगपतियों के लिए नहीं बल्कि स्थानीय किसानों और श्रमिकों के लिए भी लाभकारी होगी।नई चीनी मिलों की स्थापना और बंद पड़े मिल परिसरों के पुनरुद्धार से राज्य में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, कृषि आधारित उद्योगों का विकास होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस योजना का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार किया जाएगा।सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी भूमि चयन, निवेश और उत्पादन निर्णय स्थानीय प्रशासन और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर लिए जाएंगे।इस कदम से राज्य में गन्ना उद्योग के पुनरुद्धार के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सुधार होने की संभावना है।